Tuesday, May 12, 2020

Success Story of Kalpna Chawla : भारत की बेटी कल्पना चावला की स्टोरी

Hello Friends , क्या आपको भी Kalpna Chawla के बारे मे जान ना हे ? तो मे आपको मेरे इस Article "Success Story of Kalpna Chawla : भारत की बेटी कल्पना चावला  की स्टोरी " के सब बटौंगा, तो इसे अंत तक जरूर पढे।

दोस्तो आपको जानकार गर्व होगा की Kalpna Chawla एक American Astronaut ओर साथ मे एक Engineer भी थी। वह अंतरिक्क्ष मे जाने वाली पहेली भारतीय महिला थी। कल्पना चावला अंतरिक्क्ष मे  Space Shuttle Columbia मे गई थी जो America की Space Agency NASA के द्वारा किया गया था। यह Space Shuttle मे कल्पना चावला का दूसरी बार का सफर था ओर वो पृथ्वी के वातावरण मे प्रवेश करते हुआ उनका शुत्तले क्रेश होने से उनकी मोत  हो गाय थी।

Success Story of Kalpna Chawla, Biography of Kalpna Chawla
Success Story of Kalpna Chawla
लेकिन उनके इस बलिदान के कारण उसे काही सारे Awards से सनमानित किया गया था। और आज भी उसके सन्मान मे America और इंडिया मे उनके नामे से कही Streets, Universities and Institutions भी हे। इंडिया ने तो उसके नामे से एक उपग्रह भी लॉंच किया हे जिसका नामे "Kalpna-1" रखा हुआ हे।

हम आपको यह ब्लॉग Success Story of Kalpna Chawla : भारत की बेटी कल्पना चावला  की स्टोरी  में कल्पना चावला की पूरी बात बताएंगे उसकी पिता का नाम, माता का नाम, शिक्षा,अवार्ड,जन्म,मृत्यु पूरी बायोग्राफी के बारे में।

Success Story of Kalpna Chawla : भारत की बेटी कल्पना चावला  की स्टोरी 


कल्पना चावला के बारे में थोड़ा संक्षेप में।


  • जन्म: 17 मार्च 1962, करनाल, Hariyana। 
  • मत्यु: 1 फ़रवरी 2003, Texas।   
  • पिता का नाम -बनारसीलाल चावला 
  • माता का नाम -संज्योती चावला 
  • इनकी दो बहनें "दीपा" और "सुनीता" थी. इसके अलावा एक भाई "संजय"। 
  • कार्य: अंतरिक्ष यात्री, अंतरिक्ष शटल मिशन विशेषज्ञ
  • 1962: जुलाई को हरियाणा के करनाल में पैदा हुईं(17 march 1962)। 
  • 1982: पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज चंडीगढ़ से एरोनौटिकल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की। 
  • 1982: आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका गयीं। 
  • 1983: उड़ान प्रशिक्षक जीन पिएर्र हैरिसन से विवाह किया(जो एक फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर थे)। 
  • 1984: University of Texas  से ‘एयरोस्पेस इंजीनियरिंग’ में Master of Science  किया था। 
  • 1988: ‘एयरोस्पेस इंजीनियरिंग’ विषय में शोध किया और P.Hd की डिग्री  प्राप्त किया और नासा के लिए कार्य करने लगीं
  • 1993: ओवरसेट मेथड्स इंक में बतौर उपाध्यक्ष तथा अनुसन्धान वैज्ञानिक शामिल हुईं
  • 1995: नासा के एस्ट्रोनॉट कोर्प में शामिल हुईं
  • 1996: Columbia Space Shuttle  के एसटीएस-87 पर वे मिस्सिओना स्पेशलिस्ट के तौर पर गयीं थी
  • 1997: Columbia Space Shuttle  के एसटीएस-87 के द्वारा उन्होंने अंतरिक्ष में अपनी पहली उड़ान भरी
  • 2000: कल्पना को उनकी दूसरी अंतरिक्ष यात्रा यानि Columbia Space Shuttle  के STS-107 यात्रा के लिए चुना गया
  • 2003: 1 फरवरी को कोलंबिया अंतरिक्ष यान पृथ्वी के परिमंडल में प्रवेश करते समय टेक्सास के ऊपर दुर्घटनाग्रस्त हो गया जिसके फलस्वरूप यान पर सवार सभी 6 अंतरिक्ष यात्री मारे गए थे। 

कल्पना चावला का जन्म से पढ़ाई तक का सफर

कल्पना चावला का जन्म 17 मार्च 1962 को हरियाणा (पूर्वी राज्य) के करनाल में हुआ था पिता का नाम बनारसीलाल चावला और माता का नाम संज्योती चावला था। कल्पना चावला के परिवार में वह लोग चार भाई बहन थे उसमें से कल्पना चावला सबसे छोटी थी और सब लोग उसे प्यार से मोटू के नाम से बुलाते थे।

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Success Story of Kalpna Chawla
कल्पना चावला की शुरुआती पढ़ाई हरियाणा Karnal के टैगोर बाल निकेतन स्कूल में हुई थी। हरियाणा के पारंपरिक समाज में कल्पना जैसी लड़की के ख्वाब अकल्पनीय थे लेकिन अपने सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने चंडीगढ़ के पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज में एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में बीटेक (B.Tech) की पढ़ाई पूरी की। तब तक भारत अंतरिक्ष में काफी पीछे था, लिहाजा सपनों को पूरा करने के लिए उनका नासा जाना जरूरी था।

 इसी उद्देश्य से वह साल 1982 में अमेरिका चली गईं। उन्होंने यहां University of Texas से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में एम.टेक किया। फिर University of Florida  से P.hd की डिग्री हासिल की।

कल्पना चावला का नाशा का सफर।

जब वह 8वीं क्लास में पहुंचीं तो उन्होंने अपने पिता से इंजीनियर बनने की इच्छा जाहिर की कल्पना के पिता उन्हें डॉक्टर या टीचर बनाना चाहते थे. परिजनों का कहना है कि बचपन से ही कल्पना की दिलचस्पी अंतरिक्ष और खगोलीय परिवर्तन में थी.

वह अक्सर अपने पिता से पूछा करती थीं कि ये अंतरिक्षयान आकाश में कैसे उड़ते हैं? क्या मैं भी उड़ सकती हूं? पिता उनकी इस बात को हंसकर टाल दिया करते थे.कहते हैं कि जिसे अपने सपने पूरे करने हैं। वह अपने सपने को लेकर चल पड़ते हैं।इसी तरह कल्पना भी अपने सपनों को साकार करने 1982 में अंतरिक्ष विज्ञान की पढ़ाई के लिए अमेरिका रवाना हुई.

अगर किसी चीज़ को दिल से चाहो तो पूरी कायनात उसे तुमसे मिलाने में लग जाती है
एम.टेक की पढ़ाई के दौरान ही कल्पना को जीन-पियरे हैरिसन से प्यार हो गया था। बाद में दोनों ने शादी भी कर ली। इसी दौरान उन्हें 1991 में अमेरिका की नागरिकता भी मिल गई। इस तरह भारत की बेटी अमेरिका की होकर रह गई, लेकिन उनका भारत से संबंध हमेशा बना रहा। देश से जुड़ी होने के कारण अंतरिक्ष में किए गए तमाम कामों को भारत की लड़कियां अपने लिए आदर्श मानती है।

Success Story of Kalpna Chawla, Biography of Kalpna chawla
Success Story of Kalpna Chawla
साल 1988 में कल्पना चावला ने नासा Join किया । यहां उनकी नियुक्ति नासा के रिसर्च सेंटर में हुई थी। इसके बाद मार्च 1995 में वह नासा के अंतरिक्ष यात्री कोर में शामिल हुईं थीं। करीब आठ महीनों के कड़े प्रशिक्षण के बाद उन्होंने 19 नवंबर 1997 को अपना पहला अंतरिक्ष मिशन शुरू किया तो केवल नासा ही नहीं, भारत समेत पूरी दुनिया ने तालियां बजाकर और शुभकामनाएं देकर उनके दल को इस यात्रा पर रवाना किया था।

उन्होंने अंतरिक्ष की प्रथम उड़ान S T S 87 Columbia Shuttle से संपन्न की. इसकी अवधि 19 नवंबर 1997 से 5 दिसंबर 1997 थी.

अंतरिक्ष की पहली यात्रा के दौरान उन्होंने अंतरिक्ष में 372 घंटे बिताए और पृथ्वी की 252 परिक्रमाएं पूरी की.- इस सफल मिशन के बाद कल्पना ने अंतरिक्ष के लिए दूसरी उड़ान Columbia Shuttle 2003 से भरी
नासा में दूसरे एवं अंतिम यात्रा।
Success Story of Kalpna Chawla, Colambia Space Shuttle
Colambia Space Shuttle
1 फरवरी 2003 को अंतरिक्ष इतिहास के सबसे मनहूस दिनों में माना जाता है। यही वो दिन था जब भारत की बेटी कल्पना चावला अपने 6 अन्य साथियों के साथ अंतरिक्ष से धरती पर लौट रहीं थीं। उनका अंतरिक्ष यान Columbia Shuttle STS-107 धरती से करीब दो लाख फीट की ऊंचाई पर था। इसकी रफ्तार करीब 20 हजार किलोमीटर प्रति घंटा थी। अगले 16 मिनट में उनका यान अमेरिका के Texas  में उतरने वाला था।

 पूरी दुनिया बेसब्री से यान के धरती पर लौटने का इंतजार कर रही थी। तभी एक बुरी खबर आई कि नासा का इस यान से संपर्क टूट गया है। इससे पहले कि लोग कुछ समझ पाते इस अंतरिक्ष यान का मलबा Texas  के Dallas  इलाके में लगभग 160 किलोमीटर क्षेत्रफल में फैल गया। इस हादसे में कल्पना चावला सहित सातों अंतरिक्ष यात्रियों की मौत हो गई।

भारत की बेटी कल्पना चावला और अन्य छह साथियों की मौत के पीछे का कारण।

जब उनका विमान कामयाबी के आगाज के साथ धरती पर लौट रहा था. तभी अचानक सफलता का यह जश्न पलभर में ही मातम में बदल गया और हर मुस्कुराते चेहरे पर उदासी छा गई. सभी बेसब्री से कल्पना चावला के लौटने का इंतजार कर रहे थे, लेकिन खबर कुछ और ही आई।

 वैज्ञानिकों के मुताबिक- जैसे ही कोलंबिया ने पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश किया, वैसे ही उसकी उष्मारोधी परतें फट गईं और यान का तापमान बढ़ने से यह हादसा हुआ।
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six member with Kalpna Chawla
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक Columbia Space Shuttle के उड़ान भरते ही पता चल गया था कि ये सुरक्षित जमीन पर नहीं उतरेगा, तय हो गया था कि सातों अंतरिक्ष यात्री मौत के मुंह में ही समाएंगे।  फिर भी उन्हें इसकी जानकारी नहीं दी गई. बात हैरान करने वाली है, लेकिन यही सच है.  इसका खुलासा मिशन कोलंबिया के प्रोग्राम मैनेजर ने किया था ।

 यदि यह हादसा 16 मिनट और टल जाता तो सभी यात्री वापस सुरक्षित उतर जाते, अंतरिक्ष यात्रा के हर पल मौते के साये में स्पेस वॉक करती रहीं कल्पना चावला और उनके 6 साथी और वो पल-पल की जानकारी नासा को भेजते रहे लेकिन बदले में नासा ने उन्हें पता तक नहीं लगने दिया कि वो धरती को हमेशा-हमेशा के लिए छोड़कर जाने वाले हैं।
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Colambia Space Shuttle
उस वक्त सवाल ये था कि आखिर नासा ने ऐसा क्यों किया? क्यों उसने छुपा ली जानकारी अंतरिक्ष यात्रियों से और उनके परिवार वालों से। लेकिन नासा के वैज्ञानिक दल नहीं चाहते थे कि मिशन पर गये अंतरिक्ष यात्री घुटघुट अपनी जिंदगी के आखिरी लम्हों को जिएं. उन्होंने बेहतर यही समझा कि हादसे का शिकार होने से पहले तक वो मस्त रहे. मौत तो वैसे भी आनी ही थी.

कल्पना चावला को मिलने वाले Awards ओर सन्मान 


काँग्रेशनल अंतरिक्ष पदक के सम्मान
नासा अंतरिक्ष उड़ान पदक
नासा विशिष्ट सेवा पदक

मोदी ने मन की बात में कल्पना चावला की छवि को याद किया


भले ही आज कल्पना चावला हमारे बीच ना हों लेकिन उन्होंने पूरे विश्व को यह सन्देश दिया है कि भारत की प्रतिभा दुनिया के हर कौने में मौजूद है. कल्पना चावला जैसी बिटिया अभी हमारे देश में है। इस बात का गर्व है मुझे उसकी छवि आज पूरे देश में और पूरे विश्व में सम्मान के साथ देखी जा रही है।

Dear Readers, अंतरिक्क्ष मे 2 बार जाने का अवसर किसी महिला को मिला हे तो वो हमारे देश की "Kalpna Chawla " को मिला था , यह हमारे लिए गर्व की बात हे।

हमने इस आर्टिक्ल मे देखा Success Story of Kalpna Chawla : भारत की बेटी कल्पना चावला  की स्टोरी  की एक छोटे शहर मे जन्म लेने वाली एक महिला केसे एक सफल Astronaut बनी ।


दोस्तो आपको एसी ही महिलाओ की सफलता की कहानिया पढ़नेको मिलेगी हमारे इस Website www.aapkahindi.com पर।





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